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    भांभर रेंज में 'ऑपरेशन तेंदुआ' तेज:ड्रोन से निगरानी, 24 घंटे पेट्रोलिंग; वन विभाग अलर्ट

    3 hours ago

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    बलरामपुरड के मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक घटना के बाद भांभर रेंज में वन विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 10 अप्रैल 2026 को पचपेड़वा ब्लॉक के रेहरा गांव में हुई घटना के बाद पूरे इलाके में "ऑपरेशन तेंदुआ" युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। वन विभाग की टीमें दिन-रात गश्त कर रही हैं, जबकि ड्रोन से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। 11 और 12 अप्रैल को वन कर्मियों ने रेहरा, बेलभरिया, परसरामपुर और पिपरा सडवा गांवों के आसपास 4 से 6 किलोमीटर तक पैदल ट्रैकिंग की। हालांकि, अब तक तेंदुए के पगमार्ग की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद विभाग कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं है। वन दरोगाओं और वन रक्षकों की टीमें लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को सतर्क कर रही हैं। रेहरा, छोटका-बड़का भुकुरवा, गिद्धहवा सहित संवेदनशील गांवों में 24 घंटे पेट्रोलिंग जारी है। अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती कर इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू किया है। बैनर, पोस्टर, ई-रिक्शा और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को "क्या करें और क्या न करें" के बारे में बताया जा रहा है। विशेष रूप से वन क्षेत्र में प्रवेश न करने की सख्त हिदायत दी गई है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है। शाम ढलते ही गांवों के आसपास पटाखे फोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हिंसक वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर न बढ़ें। इसके अतिरिक्त, कैमरा ट्रैप लगाकर वन्यजीवों की हर गतिविधि रिकॉर्ड की जा रही है। वन विभाग ने ग्रामीणों को महुआ बीनने, पशु चराने और लकड़ी इकट्ठा करने के लिए जंगल में जाने से पूरी तरह रोक दिया है। ग्राम प्रधानों के साथ समन्वय स्थापित कर चौपाल और बैठकों के जरिए लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। डीएफओ ने स्पष्ट अपील की है कि कोई भी व्यक्ति जंगल की ओर न जाए और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दे। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
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