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    आशा वर्कर्स ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन:लंबित भुगतान और उत्पीड़न के आरोप में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा

    2 hours ago

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    देवरिया में आशा वर्कर्स ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने लंबित भुगतान सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की प्रदेश सहसचिव एवं जिला महामंत्री नम्रता मालवीय ने डीसीपीएम पर उत्पीड़न और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया। नम्रता मालवीय, जो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भागलपुर क्षेत्र की निवासी हैं, ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की प्रदेश सहसचिव होने के साथ-साथ देवरिया जिले की जिला महामंत्री भी हैं। राज्य कमेटी ने 9 जुलाई 2025 को उन्हें दो वर्षों के लिए इस पद पर अधिकृत किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं की एक पंजीकृत और मान्यता प्राप्त यूनियन है। हाल ही में 6 फरवरी को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के साथ यूनियन पदाधिकारियों की वार्ता हुई थी, जिसमें कई मांगों पर लिखित समझौता हुआ। इसके बाद 9 फरवरी को अपर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में गठित कमेटी के साथ दूसरे दौर की वार्ता भी हुई, जबकि तीसरे दौर की वार्ता अभी लंबित है। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि जनपद के डीसीपीएम ने भुगतान संबंधी मांगपत्र दिए जाने से नाराज होकर उनके चयन और पद की वैधानिकता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। नम्रता मालवीय का कहना है कि डीसीपीएम यह पूछते हुए दबाव बना रहे हैं कि उनके चयन के समय मुख्य चिकित्साधिकारी मौजूद थे या नहीं, जबकि यूनियन एक स्वतंत्र वैधानिक संगठन है और उसके पदाधिकारियों का चयन संगठन के संविधान के अनुसार होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में धन उपलब्ध होने के बावजूद अनावश्यक देरी की जा रही है। जब इस संबंध में आवाज उठाई गई तो उन्हें धमकाया गया और सबक सिखाने की बात कही गई। आशा वर्कर्स ने जिलाधिकारी से मांग की है कि डीसीपीएम को इस तरह के उत्पीड़न, धमकी और यूनियन की वैधानिकता पर सवाल उठाने से रोका जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि लंबित भुगतान जल्द कराया जाए, ताकि आशा कार्यकर्ताओं को राहत मिल सके।
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