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    1857 क्रांति: बलिया के मुड़िकटवा में 107 अंग्रेज सैनिक ढेर:स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों ने बाबू कुंवर सिंह की मदद में अंग्रेजों को खदेड़ा

    2 hours ago

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    बलिया के रेवती ब्लॉक स्थित कुशहर ग्राम सभा के मुड़िकटवा में 22 अप्रैल 1857 को स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों ने 107 अंग्रेज सैनिकों को मार गिराया था। यह घटना 1857 की क्रांति के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है, जहां वीरवर बाबू कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे। 1857 में पीर अली को अंग्रेजों द्वारा फांसी दिए जाने और ब्रिटिश सरकार की हड़प नीतियों से नाराज जगदीशपुर (बिहार) के बाबू कुंवर सिंह ने अपनी सेना के साथ ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाया। अस्सी वर्ष की आयु में भी कुंवर सिंह ने आरा, दुल्लौर, अतरौलिया, आजमगढ़ और मित्रसेन जैसे स्थानों पर अंग्रेज कैप्टनों के नेतृत्व वाली सेनाओं से लोहा लिया। वीरवर बाबू कुंवर सिंह जब बलिया के मनियर के रास्ते इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे, तब कैप्टन डगलस के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना लगातार उनका पीछा कर रही थी। कुंवर सिंह अपनी छोटी सैन्य टोली के साथ आगे बढ़ रहे थे और अंग्रेज सैनिक उनके पीछे लगे हुए थे। जब इसकी भनक स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों को लगी, तो उन्होंने तुरंत बाबू कुंवर सिंह की मदद की योजना बनाई। रेवती, गायघाट, त्रिकालपुर, सहतवार और क्षेत्र के अन्य गांवों के लोगों ने गायघाट में पूरी रात बांस के नुकीले खप्चार तैयार किए। 22 अप्रैल 1857 को भोर होने से पहले ही, जिस रास्ते से कुंवर सिंह आ रहे थे, उसके अगल-बगल स्थानीय वीर पारंपरिक हथियारों के साथ कुश के झुरमुटों और अरहर के खेतों में छिप गए। कुंवर बाबू की सैन्य टोली आगे बढ़ गई। जैसे ही अंग्रेज सैनिक वहां पहुंचे, स्थानीय वीरों ने छापामार शैली में उन पर हमला कर दिया और एक-एक कर 107 अंग्रेज सैनिकों को मार गिराया। उनके शव और हथियार वहीं एक कुएं में डाल दिए गए। तब से इस स्थान का नाम 'मुड़िकटवा' पड़ गया। आज उस कुएं का अस्तित्व धरातल पर नहीं है। स्थानीय लोगों द्वारा बुधवार को यहां तिरंगा फहराकर वीरवर बाबू कुंवर सिंह सहित सभी स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जाएगा।
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