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    रूसी मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंचा चीन, भारत को झटका!

    19 hours ago

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    रूस  और चाइना के बीच सैन्य सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और यही बात भारत के लिए चिंता का कारण बनती दिखाई भी दे रही थी। अभी हाल ही में खबर आई थी कि भारत में रूस का चौथा S400 रेजीमेंट का पहला खेप पहुंचा है कि उधर रशियन मीडिया में भी एक रिपोर्ट छपी कि इस हफ्ते चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले का दौरा किया। इस दौरान टीम ने कई सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया। जिनमें एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यही इलाका रूस के पूर्वी क्षेत्र में आता है जो रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। यह दौरा किसी अचानक घटना का हिस्सा नहीं था बल्कि 1990 के दशक में बने बॉर्डर ट्रस्ट बिल्डिंग मैकेनिज्म के तहत किया गया था। इसे भी पढ़ें: विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?रूस और चाइना समेत कुछ मध्य एशियाई देशों के बीच 1996 और 97 में हुए समझौते के तहत यह निरीक्षण प्रणाली लागू है। जिसका उद्देश्य सैन्य पारदर्शिता और सीमा पर भरोसा बढ़ाना था। बाद में यही ढांचा शघाई फाइव और फिर शघाई सहयोग संगठन के रूप में विकसित हुआ। रूसी समाचार एजेंसी टास्क के अनुसार इस निरीक्षण के दौरान चीनी प्रतिनिधियों ने माना कि रूस ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया है और पारदर्शिता के मानकों को बनाए रखा है। वहीं चीनी सैन्य अधिकारियों ने भी रशिया की लॉजिस्टिक्स और सिस्टम की सराहना की। इसे भी पढ़ें: India-China Tension के बीच Beijing से संदेश, Ambassador Doraiswami ने याद दिलाई 2000 साल की दोस्तीवहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी टीम के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग आपसी समझ और भरोसे पर आधारित है और इसे और आगे बढ़ाया जाएगा। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने भी चीन को रूस का स्वाभाविक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और उनका सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है बल्कि आपसी हितों पर आधारित है। हालांकि इस दौरे में सबसे बड़ी बात यह रही कि रूस ने जिस एयर डिफेंस यूनिट का निरीक्षण कराया उसके बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इससे यह सवाल भी उठने लगा कि क्या दोनों देश धीरे-धीरे अपने सैन्य सिस्टम को और करीब ला रहे हैं। पिछले कुछ सालों में रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग काफी तेजी से बढ़ा। दोनों देशों के बीच कई बार संयुक्त सैन्य अभ्यास भी देखने को मिला और रूसी राष्ट्रपति पहले भी यह कह चुके हैं कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है। आज भी भारतीय सेना के बड़े हिस्से में इस्तेमाल होने वाले हथियार और सिस्टम रूस या पूर्व सोवियत संघ से आए हैं। अनुमान के मुताबिक भारत के लगभग आधे से ज्यादा सैनी प्लेटफार्म किसी ना किसी रूप में रूसी तकनीक से जुड़े हैं। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण है। भारत के पास मौजूद S400 मिसाइल सिस्टम इग्ला एस मैनपड्स और पुराने पैचोरा जैसे सिस्टम रूस की तकनीक पर आधारित है। ऐसे में अगर रूस और चीन के बीच सैन्य तकनीक और सिस्टम का आदान-प्रदान बढ़ता है तो भारत के लिए चिंता बढ़ सकती है।
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