Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    KGMU में विभागों से दवाओं की मांग में 30-40% कमी:यूरोलॉजी विभाग के दवा घोटाले का असर, नोडल अधिकारी से फिर पूछताछ

    14 hours ago

    1

    0

    किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में सामने आए करोड़ों के दवा घोटाले के बाद दवाओं की खरीद और मांग की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। घोटाले की जांच शुरू होने के बाद कई विभागों से दवाओं की मांग में 30 से 40% तक की कमी दर्ज की गई है। डॉक्टर अब मरीजों के लिए दवाएं लिखने और इंडेंट भेजने में पहले की तुलना में अधिक सतर्कता बरत रहे हैं। उधर, घोटाले की जांच कर रही टीम ने यूरोलॉजी विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. विवेक सिंह से दोबारा पूछताछ की। करीब डेढ़ घंटे चली पूछताछ के दौरान उनसे दवाओं की खरीद, वितरण और रिकॉर्ड से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल किए गए। जांच टीम ने उनसे लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है। इसके लिए डॉ. सिंह ने कुछ समय की मोहलत ली है। डॉ.विवेक सिंह को रविवार को ट्रॉमा सेंटर से छुट्टी मिली थी। एक निजी विवाद में घायल होने के बाद उनका इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा था। जांच एजेंसियां अब दवा खरीद और वितरण प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। कई विभागों में घटी दवाओं की मांग यूरोलॉजी विभाग के अलावा मेडिसिन, सर्जरी, नेत्र रोग, कैंसर और अन्य विभागों से भी दवाओं की मांग में गिरावट आई है। जबकि अधिकांश वार्डों में मरीजों की संख्या पहले की तरह बनी हुई है। इसके बावजूद अब केवल वास्तविक आवश्यकता के आधार पर ही दवाओं का इंडेंट भेजा जा रहा है। महंगी दवाएं लिखने में बरती जा रही सावधानी घोटाले के बाद डॉक्टर महंगी दवाओं को लेकर भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, प्रोटीन सप्लीमेंट और आयरन के महंगे इंजेक्शन जैसी दवाओं को तभी लिखा जा रहा है, जब उनकी स्पष्ट आवश्यकता हो। चिकित्सक मरीज की स्थिति और उपलब्ध विकल्पों का मूल्यांकन करने के बाद ही दवा का चयन कर रहे हैं। इंडेंट फाइलों की हो रही गहन जांच दवा इंडेंट से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को लेकर भी डॉक्टरों का रवैया बदला है। कई चिकित्सक बिना पूरी जांच-पड़ताल के किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। इंडेंट फाइलों को विस्तार से पढ़ा जा रहा है और सभी औपचारिकताओं की पुष्टि के बाद ही मंजूरी दी जा रही है। जांच के बाद बढ़ी जवाबदेही विश्वविद्यालय में चल रही जांच के बीच डॉक्टरों और कर्मचारियों में जवाबदेही का भाव बढ़ा है। सूत्रों का कहना है कि दवा मांग और वितरण प्रक्रिया को लेकर अब अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। घोटाले की जांच जारी यूरोलॉजी विभाग में दवाओं की खरीद, वितरण और उपयोग को लेकर करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है। जांच के दायरे में दवा इंडेंट, वितरण रिकॉर्ड और विभागीय प्रक्रियाओं की पड़ताल की जा रही है। इसी के बाद से पूरे संस्थान में दवा प्रबंधन को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    मथुरा में 2830 अभ्यर्थियों ने छोड़ी पुलिस भर्ती परीक्षा:पहले दिन 9,672 कैंडिडेट्स ने दिया EXAM, 16 सेंटर बनाए गए थे
    Next Article
    झांसी में रेप का आरोपी गिरफ्तार:पुलिस मुठभेड़ में पकड़ा गया, दलित बच्ची को दवा दिलाने के बहाने ले गया था

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment